कमार जनजाति की आय एवं उपभोग प्रवृŸिा का अध्ययन ;धमतरी जिले के नगरीय विकासखंड के संदर्भ मेंद्ध

 

डा अर्चना सेठी

सहायक प्राध्यापकए अर्थशास्त्र अध्ययनशालाए पं रविशंकर शुक्ल वि विए रायपुर

 

धमतरी जिला छत्तीसगढ राज्य के उत्तरी पूर्वी सीमा पर रायपुर से 78 कि मी दूर 4081ण्93 कि मी में विस्तृत है। जिले में आदिवासी जनसंख्या 207633 है जो जिले की जनसंख्या का 25ण्96 प्रतिशत है। जिले में 4 तहसील धमतरी नगरीय कुरुद मगरलोड है।नगरीय विकासखंड में 179505 कुल जनसंख्या है। जनजाति जनसंख्या 110099 है जो जिले की जनजाति जनसंख्या का 53ण्01 प्रतिशत है। प्रस्तुत अघ्ययन का उददेश्य कमार जनजाति की सामाजिक आर्थिक स्थ्तिि का अघ्ययन तथा उनकी आय एवं गरीबी का अघ्ययन करना एवं शैक्षणिक स्तर का आय स्तर पर प्रभाव ज्ञात करना है। प्रस्तुत अध्ययन प्राथमिक आंकडों पर आधारित है। समंकों के संकलन हेतु अनुसूची öारा जानकारी एकत्र की गई है। विकासखंड में कुल 1029 कमार परिवार है जिसकी कुल जनसंख्या 4173 है। जिसका 2ण्64 प्रतिशत अर्थात 110 कमार का चयन दैवनिदर्शन öारा किया गया रंगराजन समीति की रिपोर्ट 2014 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में एक परिवार ;औसत 5 सदस्यद्ध 4760 रु मासिक या प्रति ब्यक्ति मासिक आय 972रु या प्रति ब्यक्ति प्रतिदिन आय 32ण्4रु को आधार माना गया है। इस अध्ययन में प्रति ब्यक्ति मासिक आय 972रु के आधार पर निदर्श परिवारों की 91ण्81 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे है। शैक्षणिक स्तर के अनुसार आय स्तर में विभिन्नता है। उपभोग ब्यय विभिन्न मद में असमान है लारेंज वक्र असममित है तथा गिनी गुणांक सूचकांक 0ण्53 है। निदर्श कमारों की 58ण्18 प्रतिशत परिवार ऋणग्रस्त है। भारत सरकार द्धारा बैगा कमार बिरहोर पहाउी कोरवा  अबूझमाडिया को विशेष पिछडी जनजाति का दर्जा दिया गया है। शासन जनजातियो के विकास के लिए जनजाति विकास अभिकरण का गठन शैक्षिक संस्थाओं का संचालन स्वरोजगार के लिए अनेक योजनाए क्रियान्वित कर रही है लेकिन विकास का लाभ कमार परिवारों को प्राप्त हो इसके लिए आवश्यक है कि योजनाओं का क्रियान्वयन ईमानदारी से हो तथा कमारों को भी जागरुक होना होगा इसके लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

 

जनजातिए गरीबी रेखाए प्रतिब्यक्ति आय।

 

छत्तीसगढ एक आदिवासी बहुल राज्य है धमतरी जिला छत्तीसगढ राज्य के उत्तरी पूर्वी सीमा पर रायपुर से 78 कि मी दूर 4081ण्93 कि मी में विस्तृत है। इसे जिले के रुप में मान्यता 6 जुलाई 1998 को प्राप्त हुआ। धमतरी जिला रायपुर संभाग के अंतर्गत आता है। जनसंख्या घनत्व 1010 ब्यक्ति प्रतिवर्ग कि मी हे। जनसंख्या दशकीय वृöिदर 13ण्19 प्रतिशत है। जनगणना 2011 के अनुसार जिले में जनसंख्या 799781 है।जिले में आदिवासी जनसंख्या 207633 है जो जिले की जनसंख्या का 25ण्96 प्रतिशत है। जिले में 4 तहसील धमतरी नगरीय कुरुद मगरलोड है। नगरीय विकासखंड में 179505 कुल जनसंख्या है। जनजाति जनसंख्या। 110099 है जो जिले की जनजाति जनसंख्या का 53ण्01 प्रतिशत है।  54015 पुरुष तथा 56084 महिला है। कमार जनजाति की जनसंख्या 4173 है। जो 1029 परिवारों में रहते है। जनगणना 2011 के अनुसार पुरुषों की जनसंख्या 2068 एवं महिलाओं की संख्या 2105 है। कमार जनजाति का 2वर्ग है। पहाड पर रहने वाले पहडपटिया एवं मैदानी भागों में रहने वाले बंधिरिजिया। कमार बस्ती से अलग जंगल में नदी के तट पर रहते है। इनका मकान घास बांस मिटटी आदि से निर्मित होता है। इनका मुख्य कार्य शिकार एवं खाद्य संग्रहण करना है। वन से जडी बूटियां एकत्र कर विक्रयकरना एवं बांस का सामान बनाना भी इनका कार्य है।

 

अध्ययन की सार्थकतारू

आजादी के 70 वर्षां बाद भी अनुसूचित जनजातियों की स्थ्तिि में विषेष सुधार नहीं आया है। विकास से अभी वे बहुत दूर है। प्रस्तुत शोधपत्र कमार जनजातियों की आय एवं उपभोगप्रवृŸिा तथा गरीबी का अध्ययन कर कुछ सुझाव प्रस्तुत किये जाएंगंें जो निश्चय ही शोधकर्Ÿााओं एवं नीतिनिर्माताओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

 

शोध साहित्य का अध्ययनरू

राव के माोहन19991 ने अपने अध्ययन में बताया कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति  समाज के सबसे पिछडें एवं सुविधाविहिन वर्ग है। देष के विकास के लिए इनका विकास अनिवार्य है।महादेवन 19622 ने अपने अध्ययन में बताया कि अनुसूचित जातियों के भोजन के चुनाव में सांस्कृतिक तत्व प्रभाव डालते है साथ ही आर्थिक स्थिति भी उनके भोजन के चुनाव पर प्रभाव डालते है।

 

आइ कवाची एव ंबी पी केनेडी 19973 इन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के पास आय के असमान वितरण के कारण आय नहीं है जिसके कारण उनका स्वास्थ्य उपचार नहीं हो पाता आय के समान वितरण के öारा इसमें सुधार लाया जा सकता है। मिश्रा एवं चक्रवर्ती 20024 ने अपने अध्ययन में बताया कि अनुसूचित जनजाति की भील महिलाएं गर्भावस्था के समय कोई विशेष आहार नहीं लेती वे ऐसे पदार्थ का सेवन नहीं करती जो गर्म हो प्रसूती के बाद गुड घी नारियल का उपभोग करती है। प्रभा चैहान ज्योती लागू वी के एस चैहान 20125 अपने अध्ययन में बताया कि छत्तीसगढ अनुसूचित जनजाति एव खनिज संसााधन प्रधान नवोदित राज्य है यहां की मुख्य जनजाति गोंड अबुझमारिया भतरा धुरवा मुरिया है।इनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति है। भसीन 20046 अपने अध्ययन में बताया कि अनुसूचित जनजाति वन से संबंधित आहार लेते है इसमें मौसमी परिवर्तन देखने को मिलता है। है।

 

प्रभा चैहान ज्योती लागू वी के एस चैहान 20127 अपने अध्ययन में बताया कि छत्तीसगढ अनुसूचित जनजाति एव खनिज संसााधन प्रधान नवोदित राज्य है यहां की मुख्य जनजाति गोंड अबुझमारिया भतरा धुरवा मुरिया है। इनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति है। वनउत्पाद पर वे जीविकोपार्जन के लिए आश्रित होते है। भसीन 20048 अपने अध्ययन में बताया कि अनुसूचित जनजाति है।वनउत्पाद पर वे जीविकोपार्जन के लिए आश्रित होते है वनउत्पाद से संबंधित आहार लेते है इसमें मौसमी परिवर्तन देखने को मिलता है।

 

अघ्ययन का उददेष्यरू

प्रस्तुत अघ्ययन का निम्नलिखित उददेश्य है

1ण्     कमार जनजाति की सामाजिक आर्थिक स्थ्तिि का अघ्ययन करना।

2ण्     कमार जनजाति की आय एवं उपभोग प्रवृŸिा का अघ्ययन करना।

3ण्     शैक्षणिक स्तर का आय स्तर पर प्रभाव ज्ञात करना।

4ण्     कमार जनजाति के लिए शासन öारा चलाए जाने वाले योजनाओं का अध्ययन करना।

 

परिकल्पनारू 

1ण्     विकासखंड में कमार जनजाति की अधिकांश जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे है।

2ण्     शैक्षणिक स्तर में विभिन्नता के अनुसार  आय स्तर में विभिन्नता पायी जाती है।

 

शोध प्रविधीरू

समंकों का संकलन प्रस्तुत अध्ययन प्राथमिक आंकडों पर आधारित है। समंकों के संकलन हेतु अनुसूची öारा जानकारी एकत्र की गई है। विकासखंड में कुल 1029 परिवार है जिसकी कुल जनसंख्या 4173 है। जिसका 2ण्64 प्रतिशत अर्थात 110 कमार का चयन दैवनिदर्शन öारा किया गया है। आवश्यकतानुसार öितीयक समंकों का भी प्रयोग किया गया है।

 

आंकडों का विश्लेषणरू

आंकडों के विश्लेषण हेतु प्रतिशत तालिका एवं रेखाचित्र का प्रयोग किया गया है। शैक्षणिक स्तर का  आय स्तर पर प्रभाव ज्ञात करने हेतु काई स्कवेयर टेस्ट 2 का उपयोग किया गया है। उपभेग ब्यय में समानता ज्ञात करने हेतु लारेंज वक्र एवं गिनी गुणांक का प्रयोग किया गया है। गरीबी रेखा से नीचे की जनसंख्या ज्ञात करने के लिए रंगराजन समिती की रिपोर्ट 2014 को आधार माना गया है।

 

तालिका 1 से स्पष्ट है कि 33ण्63 प्रतिशत निदर्श कमार परिवार वन से जडी बूटी वनोपज एकत्र कर निकट बाजार में विक्रय एवं बांस से टोकरी चटाई एवं अन्य कलात्मक सामग्र्री बनाकर विक्रय करना तथा 30ण्91 प्रतिशत मजदूरी एवं 28ण्88 प्रतिशत कृषिकार्य में संलग्न है केवल 4ण्55 प्रतिशत नौकरी एवं 0ण्09 प्रतिशत दुकान के माध्यम से जीवकोपार्जन करते है।

 

 

 

 

69ण्09 प्रतिशत परिवारों की आय 1000रु मासिक है एवं केवल 17ण्27 प्रतिशत परिवारों की आय 1000 से 2000रु है। 5ण्45 प्रतिशत कमारों की आय 2000रु से 3000रु तक है 2ण्73 प्रतिशत कमारों की आय 3000 से 4000रु तक है। 2ण्73 प्रतिशत कमारों की आय 4000 से 5000रु तक है एवं 2ण्73 प्रतिशत कमारों की आय 5000रु से अधिक है।

 

निदर्श कमार  परिवारों की गरीबी का अध्ययनरू

रंगराजन समीति की रिपोर्ट 2014 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में एक परिवार ;औसत 5 सदस्यद्ध 4760 रु मासिक या प्रति ब्यक्ति मासिक आय 972रु या प्रति ब्यक्ति प्रतिदिन आय 32ण्4रु को आधार माना गया है। इस अध्ययन में प्रति ब्यक्ति मासिक आय 972रु के आधार पर निदर्श परिवारों की 91ण्81 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे है। निदर्श कमार परिवारों की 69ण्09 प्रतिशत की प्रति ब्यक्ति मासिक आय 170ण्76 रु है जिसमें कुल निदर्श कमार परिवारों की 342 या निदर्श परिवार की कुल जनसंख्या का 68ण्67 प्रतिषत जनसंख्या ष्शामिल है। निदर्श कमार परिवारों की 17ण्27 प्रतिशत की प्रति ब्यक्ति मासिक आय 327ण्91रु है जिसमें कुल निदर्श कमार परिवारों की 86 परिवार या कुलनिदर्श जनसंख्या का 17ण्26 प्रतिषत जनसंख्या शामिल है। निदर्श कमार परिवारों की 5ण्42 प्रतिशत की प्रति ब्यक्ति मासिक आय 803ण्57रु है जिसमें कुल निदर्श कमार परिवारों की 28 परिवार या कुल निदर्श जनसंख्या का 5ण्62 प्रतिषत जनसंख्या शामिल है। निदर्श कमार परिवारों की 2ण्73 प्रतिशत की प्रति ब्यक्ति मासिक आय 11077रु है जिसमें कुल निदर्श कमार परिवारों की 14 परिवार या कुलनिदर्श जनसंख्या का 2ण्81 प्रतिषत जनसंख्या शामिल है। निदर्श कमार परिवारों की 2ण्73 प्रतिशत की प्रति ब्यक्ति मासिक आय 1136ण्66 रु है जिसमें कुल निदर्श कमार परिवारों की 15 या कुलनिदर्श जनसंख्या का 3ण्01 प्रतिषत जनसंख्या शामिल है। निदर्श कमार परिवारों की 2ण्73 प्रतिशत की प्रति ब्यक्ति मासिक आय 1143ण्75 रु है जिसमें कुल निदर्श कमार परिवारों की 16 या कुल निदर्श जनसंख्या का 3ण्21 प्रतिषत जनसंख्या ष्शामिल है।

 

 

 

 

तालिका 3 निदर्श कमार परिवारों की शैक्षणिक स्तर एवं आय अनुसार वितरण दर्शा रहा है जिससे स्पष्ट है कि 69ण्09 प्रतिशत निदर्श कमार 1000रु मासिक आय प्राप्त करते है। जिसका 50 प्रतिशत अशिक्षित है। 17ण्27 प्रतिशत 1 निदर्श कमार 1000 से 2000रु आय मासिक प्राप्त करतें हैै जिसका 36ण्8 प्रतिशत अशिक्षित है। 5ण्45 प्रतिशत निदर्श कमार 2000 रु से 3000 रु मासिक आय प्राप्त करते है जिसका 16ण्67 प्रतिशत अशिक्षित है। 2ण्73 प्रतिशत  निदर्श कमार 3000  से 4000 रु मासिक आय प्राप्त करते है जिसका क्रमशः 33ण्33 प्रतिशत प्राथ्मिक माध्यमिक एवं हाई स्कूल तक शिक्षित है। 2ण्73 प्रतिशत  निदर्श कमार 4000 से 5000 रु मासिक आय प्राप्त करते है जिसका 66ण्67 प्रतिशत हायरसेकेण्डरी एवं 33ण्33 प्रतिशत निदर्श कमार स्नातक या अधिक शिक्षित है।इस प्रकार स्पष्ट है कि शैक्षणिक स्तर  का आय स्तर पर प्रभाव पडता है। उच्च शिक्षित वर्ग उच्च आय वर्ग में शामिल है।

 

शैक्षणिक स्तर  का आय स्तर पर प्रभाव ज्ञात करने हेतु 2 का प्रयोग किया गया है।

 

 

 

तालिका से स्पष्ट है कि निदर्श कमार परिवारों की उपभोग ब्यय को 8 भागों में विभक्त किया गया है भोजन पर औसत ब्यय 56ण् 39 प्रतिशत है जैसे जैसे आय वर्ग बढता जाएगा भोजन पर प्रतिशत ब्यय कम होता गया है। आवास पर औसत ब्यय 12ण्95 प्रतिशत है कपडा पर औसत ब्यय 3ण्11 प्रतिशत है। आवास पर औसत ब्यय 12ण्95 प्रतिशत है। शिक्षा पर औसत ब्यय 2ण् 8 प्रतिशत है ईंधन पर औसत ब्यय 2 ण्55 प्रतिशत है स्वास्थ्य पर औसत ब्यय  2ण्67 प्रतिशत है नशीले पदार्थ पर औसत ब्यय 3ण्51 प्रतिशत है अन्य  पदार्थ पर औसत ब्यय 3ण् 51 प्रतिशत है। जैसे जैसे आय वर्ग बढता जा रहा है भोजन पर प्रतिशत ब्यय कम होता गया है जो एंजिल उपभोग नियम की क्रियाशीलता को स्पष्ट करता है। 

          

 

तलिका से स्पष्ट है कि 58ण्18 प्रतिशत परिवार ऋणग्रस्त है जिसमें से 42ण्18 प्रतिशत परिवारों की ऋणराशि 1000 से 2000रु है 26ण्56 प्रतिशत परिवारों की ऋणराशि 2000 से 3000रु है। 4ण्69 प्रतिशत परिवारों की ऋणराशि 4000 से 5000रु है। साक्षात्कार से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश परिवारों की ऋण का उददेश्य विवाह त्यौहार जैसे अनुत्पादक कार्य के लिए लिया गया है।

 

 

भी तलिका से स्पष्ट है कि केवल 1ण्56 प्रतिशत परिवार ऋण बैंक से लिये है 39ण्06 प्रतिशत परिवारों की ऋण का स्रोत दुकान एवं 37ण्5 प्रतिशत परिवारों की ऋण का स्रोत महाजन है 18ण्75 प्रतिशत परिवारों की ऋण रिश्तेदारों से ली गई है। जो यह स्पष्ट करता है कि ये बिल्कुल जागरुक नहीं है।

 

कमार परिवारों के लिए शासकीय योजनाएंरू

जनजाति विकास अभिकरण का गठनरू

कमार जनजाति एक विशष पिछडी जनजाति है। भारत सरकार द्धारा बैगा कमार बिरहोर पहाडी कोरवा अबूझमाडिया को विशेष पिछडी जनजाति का दर्जा दिया गया है। किसी भी जनजाति को निम्नलिखित मापदंडों के आधार पर विशेष पिछडी जनजाति का दर्जा दिया जाता है। 1 झूम खेती 2 साक्षरता का अत्यंत निम्न स्तर 3 अत्यंत पिछडे दूरदराज के क्षेत्रों में निवास करना 4 घटती हुई जनसंख्या दर का होना। इन विशेष पिछडी जनजातियों के विकास के लिए जनजाति विकास अभिकरणों का गठन किया गया है जिसमें विशेष पिछडी जनजाति मे से ही एक अध्यक्ष एवं 5 सदस्य होते है। ये अभिकरण क्षेत्र में विशेष पिछडी जनजातियों के लिए योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करना है।

 

शैक्षणिक संस्थाओं का संचालनरू

विशेष पिछडी जनजाति वर्ग के लिए प्रदेश में प्राथमिक शाला माध्यमिक शाला हाईस्कूल कन्या शिक्षा परिसर गुरुकुल विद्यालय आवासीय विद्यालय की स्थापना की गई है एवं इन्हें शैक्षणिक विकास एवं प्रोत्साहन के लिए अनेक छात्रवृति प्रदान की जाती है एवं निशुल्क पाठय पुस्तक शाला यूनीॅफाम प्रदान किया जाता है। 5 वी बोर्ड एवं 10 वीं बोर्ड में क्रमशः 85 एवं 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले जनजाति छात्र छात्राओं को बेहतर परिणाम वाले स्कूलों में शासन द्धारा निशुल्क प्रवेश देकर आगे की पढाई का ब्यय शासन द्धारा की जाती है। स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया गया है।

 

स्वरोजगार के लिए योजनारू

जनजाति वर्ग के युवाओं के रोजगार के लिए प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता शासन द्धारा प्रदान किया जाता है।श्शासकीय सेवाऔ में भर्ती के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में विशेष पिछडे जनजाति वर्ग से सीधे भर्ती किया जा सकता है।इन विशेष पिछडे जनजाति वर्ग के वन पर अधिकार हेतु विशेष नियम बनाया गया है। कृषि कार्य के लिए बीज खाद सिंचाई के लिए शासन द्धारा सहायता प्रदान किया जाता है।

 

शासकीय योजनाओं के प्रभाव से कमारों के जीवन स्तर में कुछ सुधार हो रहा है लेकिन वह अत्यंत कम है। शासकीय योजनाओं की धीमी प्रगति के निम्नलिखित कारण है

1        इनका अशिक्षित होना जिसके कारण ये योजनाओं को समझ नहीं पाते।

2        जागरुकता का अभाव

3        भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ इन तक नहीं पहुंच पाता।

 

निश्कर्षरू

अनुसूचित जनजाति समाज के अंग है इनका विकास किए बिना समाज का विकास असंभव है 91ण्81 प्रतिशत कमार आज भी गरीबी रेखा से नीचे है। इनके विकास के लिए जो भी योजनाएं बनाई गई है आवश्यकता है कि इनका ईमानदारी से क्रियान्वित किया जाय तथा कमारों को भी जागरुक होना होगा इसके लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

 

संदर्भरू

1ण्     चैबेए कैलाश ;1998द्ध मध्यप्रदेश में बस्तर के जनजातियों पर एक नोटए आदीवासी पत्रिकाए अंक 02 पृ क्र 04. 08

2ण्     प्रधानए अशोक एवं अुजुलाए गुहा ;2001द्ध छत्तीसगढ के सबरा जनजाति का आर्थिक जीवन एक अध्ययनए आदिवासी स्वास्थ्य पत्रिकाए वर्ष .49 अंक 03 पृ क्र 41. 46

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Received on 05.02.2017       Modified on 15.03.2017

Accepted on 28.03.2017      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 5(1): Jan.- Mar., 2017; Page 43-50 .